ब्लैक फंगस (BLACK FUNGUS) या म्यूकरमायकोसिस (MUCORMYCOSIS) क्या है?
ब्लैक फंगस (BLACK FUNGUS) या म्यूकरमायकोसिस (MUCORMYCOSIS) एक बहुत ही दुर्लभ संक्रमण है , ये म्यूकर फफूंद के कारण होता है , जो आमतौर पर मिट्टी , पौधे ,खाद , सड़े हुए फल और सब्जियों , हवा में, एक स्वस्थ मनुष्य के नाक और बलगम में भी में पाया जाता है । ये फंगस हर जगह पायी जाती है । हर जगह मौजूद है , और ये नयी भी नही है ,लेकिन यह COVID-19 वजह से इसे नया कहा जा रहा है ।
यह फंगस साइनस , दिमाग और फेफड़ो को प्रभावित करता है । कमजोर इम्यूनिटी (जिनका रोग प्रतिरोग क्षमता कमजोर)वाले को ,डायबीटीज के रोगी ,कैंसर के रोगी ,एच आई वी/ऐड्स के रोगी में ये फंगस जानलेवा हो सकती है।
भारत में COVID-19 की दूसरी लहर के कारण ये ज्यादा चर्चा का विषय बना है ,और ये लोगो की चिंता बढ़ा दी है । पहली लहर में इसका कही नाम नही था। यह संक्रमण एक फफूंद द्वारा फैलता है, जो म्यूकर फफूंद कहलाता है । ये आमतौर पर ख़राब खान पान में मिलता है। इतना व्यापक होने के बावजूद ये मनुष्य को संक्रमित कम ही करता है ,क्यों की हमारा रोग प्रतिरोधी तंत्र आसानी से इस रोगाणु से लड़ सकता है ।
ब्लैक फंगस का इतिहास
इसका पहला केस 1885 में जर्मनी के PAALTAUFनाम के एक पैथोलौजिस्ट ने खोजा था। इसके बाद इसे अमेरिका के पैथोलोजिस्ट आर डी बेकर ने म्यूकरमायकोसिस नाम दिया ।1995 में इससे बचनेवाला पहला व्यक्ति हैरिस था । म्यूकरमायकोसिस में मृत्यु दर 50 % तक हो सकती है । डॉक्टरों का कहना है COVID-19 के कारण गंभीर मरीजो को बचाने के लिए स्टेरॉयड के इस्तेमाल से ये संक्रमण शुरू हो रहा है । स्टेरॉयड आग में घी का काम करता है । अधिकतर मरीज जो कोरोना से ठीक हुए है , उनको 12 -15 दिनों के बाद म्यूकरमायकोसिस संक्रमण हुआ है । डॉक्टर्स का कहना है की अधिकतर मामले उनके पास देर से आते है , तब तक ये संक्रमण काफी घातक हो चूका होता है। मरीज के आँखो की रौशनी जा चुकी होती है, ऐसे में डॉक्टर्स को संक्रमण को दिमाग तक पहुँचने से रोकने के लिए उनकी दोनों आँखों को निकलना पड़ा । कुछ मामलों में तो मरीज का जबड़ा तक निकलना पड़ा ।
इसके इलाज के लिए एंटी-फंगल इंजेक्शन की जरुरत होती है । एक खुराक की कीमत 3500 रुपयें है । ये इंजेक्शन आठ हफ़्तों तक प्रतिदिन देना पड़ता है ।
साइनोसाइटिस की समस्या होगी जैसे -
- नाक बंद होना
- नाक से काले रंग का पानी या
- खून निकलना
- खून की उल्टियाँ
- खाँसी
- जबड़ो में दर्द
- आधा चेहरा सुन्न पड़ना
- आधे चेहरे पर सुजन आना
- दांत गिरना
- बुखार आना
- दर्द
- त्वचा में दाने आना
- छाती में दर्द साँस लेने में प्रॉब्लम
- थ्रौम्बोसिस के साथ साथ आँखों को धुंधला दिखना
- नाक के आस पास काला धब्बा
सबसे पहले रोगी को ब्लड शुगर की जाँच करवा लेनी चाहिए, और यदि बढ़ा हुआ है , तो कंट्रोल करने की कोशिश करनी चाहिए और जो व्यक्ति COVID-19 से ठीक हो गया , हो तो भी ब्लड शुगर की जाँच नियमित करवाते रहना चाहिए । किसी भी तरह का एंटीफंगल दवा ,स्ट्ररॉयड ,एंटीबायोटिक्स जैसे दवा बिना डॉक्टर की सलाह से नही लेनी चाहिए ।
इससे बचने के उपाय
मास्क का उपयोग करे । धुल भरी जगहों पर जाने से बचे ।मिट्टी या खाद का काम करने से पहले ग्लव्स जरुर पहने । जूतें और पूरी तरह ढकनेवाले कपडे जरुर पहने। अच्छी तरह से रगड़कर नहायें ।
कमजोर प्रतिरोधी क्षमता वाले को ज्यदा खतरा
जिनकी प्रतिरोधी क्षमता रोगाणुओं से लड़ने में कम सक्षम है । जिन्हे गंभीर बीमारी है , और वो पहले से दवा ले रहे है , जिनको शुगर की समस्या है , साँस लेने पर फफूंद फेफड़ो को संक्रमित करता है । इससे बचने के लिए मरीज के शरीर में पानी की भरपूर मौजूदगी कायम रखी जाय। शरीर में नामक पानी का संतुलन बना रहे जरुरत पड़ने पर एंटी फंगल इंजेक्शन दिया जाना चाहिए, डॉक्टर्स की निगरानी में । और मरीज पर लगातार निगरानी रखना चाहिए ।
घर में गन्दगी को बिल्कुल ही ना जमा होने दे, सब्जियों को अच्छी तरह ढककर रखें ,बासी खाना नही खाएं ,अगर खाए भी तो अच्छी तरह गर्म करके खाए ,खिड़की और दरवाजे को पूरी तरह खोल दे जिससे ताजी हवा कमरें में प्रवेश कर सकें ।
ऐसे लोगो को ब्लैक फंगस से सतर्क रहना चाहिए जिन्हें :-
- जिनका शुगर लेवल 3 -5 दिनों तक 350 से ऊपर रहा हो
- 7 दिनों तक स्ट्ररॉयड की हैवी डोज लिया हो
- जिन मरीजो को तीन से ज्यादा दिनों तक वेंटिलेटर पर या
- 5 से ज्यादा दिनों तक आई सी यू में भर्ती हुआ हो
- कैंसर के पुराने मरीज को जो किमोथेरोपी पर है या
- सामान्य या गंभीर कोरोना हुआ हो
- किडनी के मरीज जो डायलासिस पर हो या
- जिनका क्रिएटिनिन का स्तर लगातार ज्यादा हो
- किसी का ऑर्गन पलांट हुआ हो जैसे किडनी , लीवर , हार्ट
डॉक्टर्स का कहना है की ऐसे भी मरीज आये है , जो न कोरोना संक्रमित थे, न ही कभी ऑक्सीजन सपोर्ट लिया, ना ही स्टेरॉयड लिया , ना ही मधुमेह की शिकायत है, फिर भी उनको संक्रमण हुआ है ।
डॉक्टर्स का कहना है की इनकी तीन वजह हो सकती है । पहला गन्दा मास्क पहनने से ,दूसरा जिंक टेबलेट्स का अधिक मात्रा में उपयोग करने से , तीसरा कारण अधिक स्टीम लेने से यह सब जिंक फंगस का भोजन होता है , जिससे ये आसानी से अपनी ग्रोथ करते है , जबकि गन्दा मास्क इस्तेमाल करने से फंगल इन्फेक्शन की काफी संभावना बढ़ जाती है , और तीसरा अधिक स्टीम लेने नाक के अन्दर नमी बनने से फंगस ग्रोथ करते है , इसलिए डॉक्टर्स की परामर्श पर ही दवाई का सही तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए।
युवा भी संक्रमित
वरिष्ठ अधिकारी का कहना है ,की इस संक्रमण का कोई बड़ा प्रकोप नही है , परन्तु ये कहना मुश्किल है, की इतनी अधिक मामले देश में क्यों आ रहे है ?
डॉक्टर हेगड़े कहते है - कोरोना का स्ट्रेन बहुत ही संक्रामक है, जो ब्लड शुगर को बढाकर बहुत ज्यादा कर देता है। हैरान करने वाली बात यह है की अब तो युवाओ में भी म्यूकरमायकोसिस के लक्षण पाए जा रहे है । डॉ. हेगड़े कहते है-उनके पास 27 साल का युवा म्यूकरमायकोसिस का इलाज करवाने के लिए आया जिनको मधुमेह नही थी हाँ अभी कोरोना संक्रमण के दुसरे हफ्ते में ही उनकी एक आँख निकालनी पड़ी वास्तव में बहुत ही भयानक है।
मुंबई में आँखों के सर्जेन डॉ.अक्षय नायर 25 साल की एक महिला का ऑपरेशन का इंतज़ार कर रहे थे । उन्होंने बताया की जिस महिला का ऑपरेशन करना था , वो महिला तीन हफ्ते पहले ही कोरोना से ठीक हुई है , और उनको मधुमेह की समस्या है । डॉ. नायर के साथ कान , नाक और गले की विशेषज्ञ भी मौजूद थे । तीनो डॉ. की मौजूदगी में महिला की आँख निकालने के लिए तीन घंटें की सर्जेरी करनी पड़ी । ये खरतनाक संक्रामक नाक , आँख और कभी कभी दिमाग में भी फ़ैल जाता है, जिससे मरीज की मौत हो जाती है ।
डॉ. का कहना है की खासकर कोरोना से डिस्चार्ज होने के बाद शुगर लेवल का ध्यान रखना चाहिए ।
डॉ. बताते है की ब्लैक फंगस के बारे में अधूरी जानकारी के कारण लोग भ्रमित हो रहे है, ऐसे में भ्रमित ना होकर लोगो को डॉ. से परामर्श लेना चाहिए , ताकि समय पर उपचार हो सके और मरीज की आँखों की रौशनी व जान बचायी जा सके ।
DISCLAIMER :-लेख में लिखी गयी बाते जानकारी के उद्देश्य से लिखी गयी है,अत: डॉ.की परमर्श से ही दवा ले





5 टिप्पणियाँ
Thank you for giving me this important information.
जवाब देंहटाएंI didn't know that much about it before,
A very informative information about black fungus.It will help a lot to the readers.
जवाब देंहटाएंA very informative information about black fungus.It will help a lot to the readers.
जवाब देंहटाएंA very informative information about black fungus.It will help a lot to the readers.
जवाब देंहटाएंVery effective
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